Aapatkal Mein Gujarat — Page 53

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गुजरात के कुछ विधायकों के साथ भी श्री नानाजी की मुलाकात की
व्यवस्था गांधीनगर में की गई | विधायकों के साथ अपनी बातचीत में उन्होंने बताया
कि गुजरात में मोरचा सरकार का बना रहना देश भर के नागरिकों में उम्मीद बनाए
हुए है। संघर्ष के प्रभाव को और व्यापक बनाने के लिए मोरचा सरकार को लोकतंत्र
के प्रतीक के रूप में स्थापित कर लोगों के हितों की रक्षा के लिए कड़ी मेहनत
करने की आवश्यकता पर उन्होंने जोर दिया। श्री नानाजी के पास देश भर की सारी
जानकारी थी। कौन-कौन गिरफ्तार हुए हैं, किसे-किसे जेल में रखा गया है, यह
विस्तृत जानकारी भी उन्होंने विधायकों को दी। इतने कम समय में उनके पास
उपलब्ध इन छोटी-से-छोटी जानकारियों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि
भूमिगत अवस्था के दौरान की संपर्क-व्यवस्था कितनी दुरुस्त थी।

इसी दौरान सांसद श्री वीरेंद्र शाह भी अहमदाबाद में थे। उनके साथ भी एक
मुलाकात रखी गई, जिसमें संघर्ष की भविष्य की व्यूह-रचनाओं एवं वर्तमान
स्थितियों के बारे में विस्तृत चर्चा हुई।

संस्था कांग्रेस के श्री दिनिशभाई शाह से भी बदली हुई परिस्थिति में संघर्ष
की भूमिका, गुजरात के राज्यसभा चुनाव, अन्य राज्यों में आंदोलन की स्थिति
इत्यादि अनेक मुद्दों पर चर्चा हुई। मोरचा मंत्रिमंडल के श्री केशूभाई पटेल, wit
इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन के चेयरमैन श्री हरिसिंहजी गोहिल तथा जनसंघ के मंत्री श्री
बसंत गजेंद्र गडकर से भी श्री नानाजी की मुलाकातें हुईं। आरं.एस.एस. के प्रांत
प्रचारक श्री केशवरावजी देशमुख तथा क्षेत्र प्रचारक श्री वकील साहब (जो कि उन
दिनों गुजरात के दौरे पर थे) से भी श्री नानाजी की भेंट हुई।

गुजरात का त्रिदिवसीय प्रवास सुरक्षित रूप से संपन्न करने के बाद अब
उन्हें महाराष्ट्र के लिए विदा होना था। गुजरात में वे कैसे आए, वे कितने दिन रुकने
वाले हैं तथा इसके बाद उन्हें कहाँ जाना है, ये तमाम बातें गुप्त रखी गई थीं।

उनकी महाराष्ट्र यात्रा के बारे में भी पूरी सावधानी बरती गई। उनका कार
द्वारा बंबई जाना ठीक समझा गया। श्री शिवकुमार, जो कि एडवोकेट थे तथा श्री
अटल बिहारी वाजपेयी के निजी सचिव भी थे, दिल्ली से ही श्री नानाजी के साथ
थे। अपनी पहचान छिपाए रखने हेतु उन्होंने अपनी बहुपरिचित मूँछें साफ करवा दी
थीं। वे भी श्री नानाजी के साथ बंबई जाने वाले थे। यात्रा को गुप्त बनाए रखने के
लिए सोचा गया कि यदि कोई बहन भी उनके साथ यात्रा में शामिल हो जाए तो
प्रतीत होगा कि कोई परिवार यात्रा कर रहा है और किसी को कोई संदेह न होगा।
इस कार्य के लिए श्रीमती विद्या बहन गजेंद्र गडकर की सहायता ली गई । इस प्रकार
ae # आपातकाल में गुजरात #

English translation

[Translation failed for this section.]

गुजरात के कुछ विधायकों के साथ भी श्री नानाजी की मुलाकात की
व्यवस्था गांधीनगर में की गई | विधायकों के साथ अपनी बातचीत में उन्होंने बताया
कि गुजरात में मोरचा सरकार का बना रहना देश भर के नागरिकों में उम्मीद बनाए
हुए है। संघर्ष के प्रभाव को और व्यापक बनाने के लिए मोरचा सरकार को लोकतंत्र
के प्रतीक के रूप में स्थापित कर लोगों के हितों की रक्षा के लिए कड़ी मेहनत
करने की आवश्यकता पर उन्होंने जोर दिया। श्री नानाजी के पास देश भर की सारी
जानकारी थी। कौन-कौन गिरफ्तार हुए हैं, किसे-किसे जेल में रखा गया है, यह
विस्तृत जानकारी भी उन्होंने विधायकों को दी। इतने कम समय में उनके पास
उपलब्ध इन छोटी-से-छोटी जानकारियों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि
भूमिगत अवस्था के दौरान की संपर्क-व्यवस्था कितनी दुरुस्त थी।

इसी दौरान सांसद श्री वीरेंद्र शाह भी अहमदाबाद में थे। उनके साथ भी एक
मुलाकात रखी गई, जिसमें संघर्ष की भविष्य की व्यूह-रचनाओं एवं वर्तमान
स्थितियों के बारे में विस्तृत चर्चा हुई।

संस्था कांग्रेस के श्री दिनिशभाई शाह से भी बदली हुई परिस्थिति में संघर्ष
की भूमिका, गुजरात के राज्यसभा चुनाव, अन्य राज्यों में आंदोलन की स्थिति
इत्यादि अनेक मुद्दों पर चर्चा हुई। मोरचा मंत्रिमंडल के श्री केशूभाई पटेल, wit
इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन के चेयरमैन श्री हरिसिंहजी गोहिल तथा जनसंघ के मंत्री श्री
बसंत गजेंद्र गडकर से भी श्री नानाजी की मुलाकातें हुईं। आरं.एस.एस. के प्रांत
प्रचारक श्री केशवरावजी देशमुख तथा क्षेत्र प्रचारक श्री वकील साहब (जो कि उन
दिनों गुजरात के दौरे पर थे) से भी श्री नानाजी की भेंट हुई।

गुजरात का त्रिदिवसीय प्रवास सुरक्षित रूप से संपन्न करने के बाद अब
उन्हें महाराष्ट्र के लिए विदा होना था। गुजरात में वे कैसे आए, वे कितने दिन रुकने
वाले हैं तथा इसके बाद उन्हें कहाँ जाना है, ये तमाम बातें गुप्त रखी गई थीं।

उनकी महाराष्ट्र यात्रा के बारे में भी पूरी सावधानी बरती गई। उनका कार
द्वारा बंबई जाना ठीक समझा गया। श्री शिवकुमार, जो कि एडवोकेट थे तथा श्री
अटल बिहारी वाजपेयी के निजी सचिव भी थे, दिल्ली से ही श्री नानाजी के साथ
थे। अपनी पहचान छिपाए रखने हेतु उन्होंने अपनी बहुपरिचित मूँछें साफ करवा दी
थीं। वे भी श्री नानाजी के साथ बंबई जाने वाले थे। यात्रा को गुप्त बनाए रखने के
लिए सोचा गया कि यदि कोई बहन भी उनके साथ यात्रा में शामिल हो जाए तो
प्रतीत होगा कि कोई परिवार यात्रा कर रहा है और किसी को कोई संदेह न होगा।
इस कार्य के लिए श्रीमती विद्या बहन गजेंद्र गडकर की सहायता ली गई । इस प्रकार
ae # आपातकाल में गुजरात #

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